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आचार्यश्री की निश्रा में महावीर जन्मकल्याणक धूमधाम से मनाया गया

राजगढ़,  मध्यप्रदेश  (धार)। दादा गुरुदेव श्रीमद्विजय राजेन्द्रसूरीश्वर जी म.सा. की पाट परम्परा के अष्ठम पटधर श्री मोहनखेड़ा तीर्थ विकास प्रेरक, राजकीय अतिथी, वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. आदि ठाणा 7 एवं आचार्य महाश्रमण जी के शिष्य मुनि अजितकुमारजी, मुनि अभिजितकुमारजी, श्रमण संघीय उपप्रवर्तिनी महाराष्ट्र सौरभ पूज्या महासती सत्यसाधनाजी म.सा. आदि ठाणा 9 की पावनतम निश्रा में 2617 वां श्री महावीर स्वामी जन्म कल्याणक महोत्सव भायन्दर पूर्व में 29 मार्च गुरुवार को ओस्तवाल बगीचा आर.एन.पी. पार्क में धुमधाम से मनाया गया । इस कार्यक्रम में मुख्यअतिथि मा. श्री योगेन्द्रराजजी सिंघवी, सम्मानीय अतिथी श्री नरेन्द्रजी मेहता विधायक, विशेष अतिथि श्रीमती डिम्पलजी मेहता महापौर, स्वागत अध्यक्ष मा. श्री पारसमलजी चपलोद, श्री मोहनखेड़ा तीर्थ ट्रस्टी श्री सुखराजजी कबदी एवं समाजसेवी नवरत्न डागा, प्रकाश सेजलमणी, परेश सिंघी, रणजीत जैन, कांतिलाल बाबेल, अशोक जैन सहित कई वरिष्ठ समाजसेवी समाजजन बढ़ी संख्या में उपस्थित रहे ।
  प्रातः 8ः30 बजे भव्य शौभायात्रा में भगवान महावीरस्वामी के चित्र 21 से अधिक घोड़ा बग्गीयों में लेकर लाभार्थी परिवार बैठे थे । भव्य शौभा यात्रा नाकोड़ा भवन ओस्तवाल ओनेक्स बिल्डिंग से प्रारम्भ होगी जो जेसल पार्क, स्टेशन रोड़, बी.पी. रोड़, गोडदेव नाका, नवघर रोड़, एस.बी. रोड़ होते हुये कार्यक्रम स्थल पर पहुंची । दीप प्रज्जवलन मंचासीन अतिथियों द्वारा किया गया । समस्त श्री राजस्थान जैन संघ के पदाधिकारियों ने आये हुऐ अतिथियों का तिलक, माला, शाल और अभिनन्दन पत्र से सम्मान किया । राजस्थान जैन संघ में संचालित पाठशाला के बच्चों ने रंगारंग मन भावन नृत्य प्रस्तुति दी ।
श्री महावीर स्वामी जन्मोत्सव पर गच्छाधिपति आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. ने कहा कि भगवान महावीर के जीवन में दो घटनाऐं घटी जो अनेकांतवाद के सूत्र को प्रतिपादित करती है । हम अनेकांतवाद को मानते है । मोक्ष की और जाने की क्रिया अनेक है पर मोक्ष एक है । शरीर में रोग अनन्त है पर औषधि लेना का मार्ग सिर्फ मुंह है । लक्ष्य एक है तो ही हम भगवान महावीर के सच्चे उपासक है । आचार्यश्री ने प्रेरणादायी बात बताते हुये कहा कि कल्पसूत्र में एक ऐसा वर्णन आता है कि किसी ने भगवान महावीर स्वामी को निर्वाण के समय अपना आयुष्य ढाई घटी तक रोकने का कहा था उस समय राहुकाल चल रहा था । उस समय यह कहा गया था कि समाज और प्रभु को मानने वाले अलग-अलग भागों में बट जायेगे । तब प्रभु ने कहा जो होना होगा वह चलेगा ।
          इतिहास में 2500 वर्षो समाज में प्रभु के मानने वाले अलग- अलग भागों में बंट गये । अब हम एकता की और बढ रहे है । प्रभु ने हमेशा ऐसा भी होता है यही कहा ! प्रभु ने ऐसा ही होता है ये कभी नही कहा ! हम जितेन्द्रीय बने तभी जैन कहलायेगे । हम अभी सिर्फ जाति से जैन है प्रभु के सिद्धांतों को मानने वाला हर व्यक्ति जैन कहलाता है । हमारे जीवन में त्याग है ही नहीं और हम साधु के जीवन में त्याग की अपेक्षा करते है । नारे लगाने से जैन धर्म आगे नही बढ़ेगा ! जैन धर्म को आगे बढाना है तो प्रभु के बताये हुऐ सिद्धांतों को जीवन में अंगीकार कर उसे अमल में लाये तभी हमारा जीवन सफल होगा और हमारा जैन धर्म उत्तरोतर शिखर की और आगे बढेगा । मंगल प्रवचन के बाद आचार्यश्री ने महामांगलिक का श्रवण कराया । समस्त श्री राजस्थान जैन संघ भायन्दर पूर्व द्वारा महावीर स्वामी जन्मकल्याणक महोत्सव का आयोजन किया गया । कार्यक्रम में विशेष रुप से अध्यक्ष उमरावसिंह ओस्तवाल, कार्याध्यक्ष दिलीप जैन, महामंत्री सुन्दरलाल लोढ़ा, कोषाध्यक्ष मांगीलाल पामेचा, संगठन मंत्री निर्मल जैन आदि उपस्थित रहे । कार्यक्रम की पूर्णाहुति पर स्वामीवात्सल्य का आयोजन किया गया ।
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